अम्बर की ये उचाई,धरती की ये गहराई # Tahir Faraz Shayari


Ambar ki ye uchayi,dharti ki ye gehrayi tahir faraz shayari on maa


~~ Tahir Faraz Shayari on Maa ~~

Ambar ki ye uchayi,dharti ki ye gehrayi
Tere mann me hai samayi O Maayi...

Tera mann amrit ka pyala ,yehi kaba yehi shivala
Teri mamta jeevan dayi O Maayi..

Jee chache kyu tere sath rahu kyu mai banke tera hamjoli
Tere hath na aau yu chup jau yu khelu aankh micholi...

Pariyo ki kahani sunake ,koi meethi lori sunake
Karde Sapne sukhdayi O maayi..

Sansaar ke taane baane se ghabrata hai mann mera
In jhuthe rishto naato me bas pyar hai sacha tera..

Sab dukh sukh me dhal jaye teri bahe jo mil jaye
Mil jaye mujko khudayi O maayi...

Jaade ki thandi raato me jab der se mai ghar aau
Halki si dastak pe apni tuje jaagta hua mai pau...

Sardi se thithurti jaaye thanda bistar apnaye 
Muje deke garm rajayi O maayi...

Phir koi shararat ho mujse naraz karu phir tujko
Phir gaal pe thappi maar ke tu seene se laga le mujko..

Bachpan ki pyas bhujade apne hatho se khilade mithayi O Maayi..
❤❤❤❤
अम्बर  की ये उचाई,धरती की ये गहराई
तेरे मन मे है समाई ओ माई...

तेरा मन अमृत का प्याला ,यही काबा यही शिवाला
तेरी ममता जीवनदायी  ओ माई..

जी चाहे  क्यू तेरे साथ रहू  क्यू मै  बनके तेरा हमजोली
तेरे हाथ ना आउ  यू चुप  जाऊ  यू खेलु आँख मिचोली...

परियो की कहानी सुनके ,कोई मीठी लोरी सुनके
करदे  सपने सुखदायी ओ माई..

संसार के ताने बाने से घबराता है मन मेरा
इन झूठे रिश्तो नातो  मे बस प्यार है सच्चा  तेरा..

सब दुख सुख मे ढल जाए तेरी बाहे जो मिल जाए
मिल जाए मुझको  खुदाई ओ माई...

जाड़े की ठंडी रातो मे जब देर से मै घर आउ 
हल्की सी दस्तक पे अपनी तुझे  जागता हुआ मई पाऊ...

सर्दी से तिठुरती जाए ठंडा बिस्तर अपनाए 
मुझे  दे के गर्म रज़ाई ओ माई...

फिर कोई शरारत हो मुझसे  नाराज़ करू फिर तुझको 
फिर गाल पे ठप्पी मार के तू सीने से लगा ले मुझको ..

बचपन की प्यास भुजा दे अपने हाथो से खिलाके  मिठाई ओ माई..

अम्बर  की ये उचाई,धरती की ये गहराई
तेरे मन मे है समाई ओ माई...

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