Mumkin Nahi Ki Jazba-e-Dil Kargar Na Ho -Jigar Moradabadi Shayari

Mumkin Nahi Ki Jazba-e-Dil Kargar Na Ho -Jigar Moradabadi Shayari

Mumkin Nahi Ki Jazba-e-Dil Kargar Na Ho -Jigar Moradabadi Shayari

मुमकिन नहीं कि जज़्बा-ए-दिल कारगर  न हो
ये और बात है तुम्हें अब तक ख़बर न हो

तौहीने-इश्क़ देख न हो ऐ ‘ जिगर’ न हो
हो जाए दिल का ख़ून मगर आँख नम न हो

लाज़िम  ख़ुदी का होश भी है बेख़ुदी के साथ
किसकी उसे ख़बर जिसे अपनी ख़बर न हो

एहसाने-इश्क़ अस्ल में तौहीने-हुस्न  है
हाज़िर है दीनो-दिल भी ज़रूरत अगर न हो

या तालिबे-दुआ था मैं इक- एक से ‘जिगर’
या ख़ुद ये चाहता हूँ दुआ में असर न हो
 -Jigar Moradabadi Shayari

Previous
Next Post »

Recent Updates