Dil Me Tum Ho Nazar Ka Hangaam Hai-Jigar Moradabadi Shayari

Dil Me Tum Ho Nazar Ka Hangaam Hai-Jigar Moradabadi Shayari

Dil Me Tum Ho Nazar Ka Hangaam Hai-Jigar Moradabadi Shayari

दिल में तुम हो नज़अ  का हंगाम है 
कुछ सहर  का वक़्त है कुछ शाम है

इश्क़ ही ख़ुद इश्क़ का इनआम है
वाह क्या आग़ाज़ क्या अंजाम है

दर्द-ओ-ग़म दिल की तबीयत बन चुके 
अब यहाँ आराम ही आराम है 

पी रहा हूँ आँखों-आँखों में शराब 
अब न शीशा है न कोई जाम है 

इश्क़ ही ख़ुद इश्क़ का इनाम है 
वाह क्या आग़ाज़ क्या अंजाम है 

पीने वाले एक ही दो हों तो हों 
मुफ़्त सारा मैकदा बदनाम है
-Jigar Moradabadi Shayari

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