Desh Bhakti Shayari

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Desh Bhakti Shayari

Desh Bhakti Shayari

सहमा सा है वतन कुछ लोग खून मागते है

कुछ लोग मेरा हिन्दुस्तानी वजूद  मागते है..

ज़माना बीता है जिनका फिरंगियो की मुखबिरी मे
वो आज मुजसे देश भक्त होने का सबूत मागते है..
❤❤

ज़माने भर में मिलते हे आशिक कई ,
मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता ,
नोटों में भी लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे हे कई ,
मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता.

❤❤
चलो फिर से आज वो नज़ारा याद कर ले 
शहीदों  के दिल थी जो जवाला वो याद कर ले 
जिसमे बह कर आज़ादी पहुंची थी किनारे पर 
देशभक्तो के खून की वो धरा याद कर ले 
❤❤
कुछ नशा ये तिरंगे की आन  का है 
कुछ नशा मातृभूमि के मान का है 
हम लहराएंगे हर जगह ये तिरंगा 
नशा ये हिन्दुस्तान की शान का है 
❤❤
खुशनसीब है वो जो वतन पर मिट जाते है 
मरकर भी वो लोग अमर हो जाते है 
करता हु तुम्हे सलाम ए वतन पर मिटने वालो 
तुम्हारे हर सास में तिरंगे का नसीब बस्ता है 
❤❤
जो अब तक  ना खोला वो खून  नहीं पानी है 
जो देश के काम ना आये बेकार वो जवानी है 
❤❤
इतनी सी बात हवाओ को बताये रखना 
रौशनी होगी चिरागो  को जलाये रखना
लहू देकर की है जिसकी हिफाजत हमने 
ऐसे तिरंगे को हमेसा दिल में बसाये रखना 

~ Desh Bhakti Shayari





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