Ajnabi khwahishein Seene Me Dba Bhi Na Saku -Rahat Indori Shayari

,

Ajnabi khwahishein Seene Me Dba Bhi Na Saku Rahat Indori Shayari

Ajnabi khwahishein Seene Me Dba Bhi Na Saku Rahat Indori Shayari

अजनबी ख्वाहिशें सीने में दबा भी न सकूँ
ऐसे जिद्दी हैं परिंदे के उड़ा भी न सकूँ

फूँक डालूँगा किसी रोज ये दिल की दुनिया
ये तेरा खत तो नहीं है कि जला भी न सकूँ

मेरी गैरत भी कोई शय है कि महफ़िल में मुझे
उसने इस तरह बुलाया है कि जा भी न सकूँ

इक न इक रोज कहीं ढ़ूँढ़ ही लूँगा तुझको
ठोकरें ज़हर नहीं हैं कि मैं खा भी न सकूँ

फल तो सब मेरे दरख्तों के पके हैं लेकिन
इतनी कमजोर हैं शाखें कि हिला भी न सकूँ..

---Rahat Indori Shayari


0 comments to “Ajnabi khwahishein Seene Me Dba Bhi Na Saku -Rahat Indori Shayari”

Post a Comment

Recent Posted Ghazal

 

Shayari Zone Copyright © 2017 | Disclaimer Disclaimer | Contact us Contact us | Privacy PolicyPrivacy Policy