Naksh Faryadi Hai By Mirza Galib

Naksh Faryadi Hai By Mirza Galib

Naksh Faryadi Hai By Mirza Galib

नक़्श फ़रियादी है, किसकी शोख़ी--तहरीर का
काग़ज़ी है पैरहन, हर पैकर--तस्वीर का..

काव-काव- सख़्तजानीहा--तन्हाई, पूछ
सुबह करना शाम का, लाना है जू--शीर का..

जज़्ब:--बेइख़्तियार--शौक़ देखा चाहिये
सीन:--शमशीर से बाहर है, दम शमशीर का..

आगही, दाम--शुनीदन, जिस क़दर चाहे बिछाए
मुद्दआ़अ़न्क़ा है, अपनेआ़लम--तक़रीर का..

बसकि हूँ, ग़ालिब, असीरी में भी आतिश-ज़ेर--पा
मू--आतिश-दीद़: है हल्क़: मिरी ज़ंजीर का...


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