Dil He Nahi To Dil Ke Saharo Ka Kya Karu-Anup Jalota Ghazal

Dil He Nahi To Dil Ke Saharo Ka Kya Karu-Anup Jalota Ghazal

Dil He Nahi To Dil Ke Saharo Ka Kya Karu-Anup Jalota Ghazal

Dil he nahi to dil ke saharo ka kya karu
Jab paas tum nahi to baharo k0 kya karu..

Jalwo se jiske chaand sitaro me thi jiyaa
Ab wo hasi nahi to sitaro k0 kya karu..

Dil he nahi to dil ke saharo ka kya karu..2

Tasveer aur tassavure jana ye sab fareb
Mai unse dur unke nazaro ko kya karu..

Dil he nahi to dil ke saharo ka kya karu
Jab paas tum nahi to baharo k0 kya karu..

wo jannat-e-nigaahe wo dose-rang-o-buu
gujri huyi haseen baharo ko kya karu...

Dil he nahi to dil ke saharo ka kya karu..2

Khawabo se noor cheen liya aye khayal-e-yaar
Tere begair tere isharo ko kya karu..

Dil he nahi to dil ke saharo ka kya karu
Jab paas tum nahi to baharo ko kya karu..

❤❤❤❤


दिल ही  नही तो दिल के सहारो का क्या करू
जब पास तुम नही तो बहारो को  क्या करू..

जलवों  से जिसके चाँद सितारो मे थी जिया
अब वो हसी नही तो सितारो को  क्या करू..

दिल हे नही तो दिल के सहरो का क्या करू..2

तस्वीर और तस्साउरे जाना ये सब फरेब
मै  उनसे दूर उनके नज़ारो को क्या करू..

दिल ही  नही तो दिल के सहारो का क्या करू
जब पास तुम नही तो बहारो को  क्या करू..

वो जन्नत-ए-निगाहे वो दोस -रंग-ओ-बुऊ
गुज़री हुई हसीन बहारो को क्या करू...

दिल हे नही तो दिल के सहरो का क्या करू..2

खवाबो से नूर  छीन लिया ए ख़याल-ए-यार
तेरे बेगैर तेरे इशारो को क्या करू..

दिल ही  नही तो दिल के सहारो का क्या करू
जब पास तुम नही तो बहारो को  क्या करू..

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