Ishq


hindi shayari



ishq jab se tasleem kiya,ghar mera dozakh hua..
mansoob hui vehshhat meri,zamana mera khuda hua.....

इश्क़ जब से तस्लीम किया घर मेरा दोज़ख हुआ 
मनसूब हुई वेह्शत मेरी ज़माना मेरा खुदा हुआ 


jazb kar leta aankho me,gar hota wo mere wajood sa..

naam tha uska mohabbat,wo bhi tha zamane ka luta hua...


जज़्ब कर लेता आँखों में अगर होता वो मेरे वजूद सा
नाम था उसका मोहब्बत वो भी था ज़माने का लुटा हुआ


bikta firaa bazm-e-gair me mere khawabo ki tarh...
aatish-e-aakhe thi uski,shayad use bhi koi gila hua....

बिकता फिरा  बज़्म-ए -गैर में मेरे खवाबो की तरह

 आतिश-ए -आँख थी उसकी सायद उसे भी कोई गिला हुआ 

noor-e-zulmat hu mai,muje mitta ke kya hasil...
kisi ki nigaaho me,roshni ka shyad mai sabab hua...

नूर-ए -ज़ुल्मत हू मै मुझे मिटा के क्या हासिल 
किसी की निगाहो में रौशनी का शायद मै सबब हुआ 

aur "dard" basa to leta nash-e-mann jannat khaakh me...
magar mehboob mera koi tujsa na hua...........

और दर्द बसा तो लेता नश -ए -मन  जन्नत ख़ाक में 
मगर मेहबूब मेरा कोई तुजसे ना  हुआ... 




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